बिहार के समस्तीपुर में एक अयोध्या, सर्वे में गांव का नाम सिरिरामपुर अयोध्या अंकित

बिहार के समस्तीपुर में एक अयोध्या, सर्वे में गांव का नाम सिरिरामपुर अयोध्या अंकित


🔸महर्षि विश्वामित्र राम-लक्ष्मण के साथ जनकपुर जाने के दौरान रात्री विश्राम के लिए यहां रूके तो गांव का हुआ नामकरण।

सिटी ब्यूरो रिपोर्ट : आनन्द कुमार

समस्तीपुर :- जहाँ एक ओर अयोध्या में 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा को लेकर अयोध्या के साथ-साथ पूरे देश में उत्साह का माहौल है। वहीं पूरी अयोध्या नगरी राममय बनी हुई है। इसके साथ ही दुसरी ओर बिहार के अयोध्या के लोगों में भी खासा उत्साह है। जहां रामभक्त प्राण प्रतिष्ठा को लेकर भव्य तैयारी में जुटे हुए हैं। बताते चलें कि समस्तीपुर जिले के पूसा प्रखंड में श्री रामपुर अयोध्या गांव अवस्थित है। हालांकि इस गांव का नाम श्रीरामपुर अयोध्या होने से यहां के लोग खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे है बल्कि उनके अंदर अयोध्यावासी की तरह ही उत्साह और उल्लास है।


यह भी बताते चलें कि गांव के नाम के पीछे कई पौराणिक चर्चाएं है। ग्रामीणों के अनुसार जब भगवान राम बक्सर से महर्षि विश्वामित्र के आश्रम से असुरों का संघार कर जनकपुर जा रहे थे तो उस वक्त उन्होंने यहां रात्रि विश्राम किया था। तथा दूसरा कथनानुसार भगवान श्री राम विवाह के लिए अयोध्या से जनकपुर जब जा रहे थे तब बारात इस गांव में रुकी थी। जिस कारण वश उनके गांव का नाम श्रीरामपुर अयोध्या पड़ा गया। हालांकि इन चर्चाओं का कोई ठोस आधिकारिक प्रमाण तो नहीं है लेकिन ग्रामीणों का बताना है कि 1892 – 94 में हुए सर्वे के दस्तावेज में गांव का नाम सिरिरामपुर अयोध्या अंकित है। अब इन चर्चाओं की सच्चाई चाहे जो भी कुछ हो भगवान श्री राम के नाम से गांव का नाम का जुड़ाव होने को लेकर ग्रामीण अपने आप को गौरवान्वित महसूस करते हैं। 

ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा को लेकर वहां भव्य आयोजन किया जा रहा है। अयोध्या के साथ-साथ पूरे देश में दीपावली मनाई जाएगी। ठीक वैसे ही हर्षोल्लास के साथ गांव के राम जानकी मंदिर में भी भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

     ग्रामीण यह भी बताते हैं कि गांव के इस राम जानकी मंदिर की कहानी भी कुछ अयोध्या जैसी ही मिलती जुलती कहानी है। जिस प्रकार वहां काफी लंबे अर्शे तक विवाद के कारण उनकी पूजा अर्चना नहीं हो रही थी। ठीक वैसे ही इस राम जानकी मंदिर में आपसी विवाद के कारण 11 – 12 वर्षों तक पूजा पाठ बंद रहा। बाद में न्यायालय से फैसला आने के बाद ही मंदिर में विधिवत पूजा अर्चना शुरू हुई। अब यह है कि  22 जनवरी को सुबह से ही राम जानकी ठाकुरबाड़ी में भजन – कीर्तन, आरती के साथ साथ भंडारा का आयोजन किया जाएगा। पूजा - पाठ को लेकर मंदिर परिसर में साफ-सफाई करवाई जा रही है। जहां लोग काफी खुशी पूर्वक मंदिर परिसर की साफ - सफाई में अपना योगदान दे रहे हैं।

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