रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर केकेएम कॉलेज के सभागार में परिचर्चा का आयोजन
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर केकेएम कॉलेज के सभागार में परिचर्चा का आयोजन
प्रभु श्रीराम ने भारत को आसुरी आतंकवाद से कराया था मुक्त, भगवान राम और कृष्णा हिंदू समाज के प्राणाधार : प्रो. गौरीशंकर
अपने अध्यक्षीय प्रबोधन में डॉ.(प्रो.) गौरी शंकर पासवान ने कहा कि भगवान श्रीराम हिंदू धर्म के महान देवता हैं। राम हमारे भगवान है। यही हमारे अभिमान और पहचान हैं । राम नाम ही स्वर्ग का द्वार है। राम नाम जपने से मानव जीवन का कल्याण है। भगवान राम और उनके विचार आज भी प्रासंगिक व उपादेय हैं। भगवान राम और कृष्णा हिंदू समाज के प्राणाधार हैं। इन दोनो नामों के अभाव में हिन्दू संस्कृति की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। श्री राम का चरित्र परिवार, समाज, शास्त्र, शासन आदि सबकी मर्यादाओं का समग्र नीति नियमों का पालन करने वाला चरित्र है। उनका राम राज्य आज भी हमारे आदर्श राज्य के रूप में प्रसांगिक बना हुआ है। जब भी अंत समय आता है मुख पर राम नाम आता है। यही भगवान राम की महिमा है। भारत विश्व का एक अनोखा देश है, जहां भगवान राम की जन्म भूमि पांच सौ वर्षों से मंदिर विहिन रही। लगभग 500 वर्षो के बाद आगामी 22 जनवरी को भगवान श्री राम की मूर्ति का प्राण-प्रतिष्ठा हो जाएगी। यह भारत के लिए गौरव और खुशी की बात है। प्राण-प्रतिष्ठा की निर्धारित तिथि जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे हिंदुस्तान के राम भक्तों के रोम रोम में उल्लास रूपी बिजली का स्पंदन होने लगा है, नस नस में खुशी की लहर दौड़ने लगी है। मन प्राणों पर भावों के मनमोहक इंद्रधनुष छाने लगे हैं। राम मंदिर निर्माण और प्राण- प्रतिष्ठा का मौका जन-जन को एक तार में गुथ देने वाला सुअवसर है।
प्रो.पासवान ने कहा कि प्रभु श्रीराम आसुरी आतंकवाद से भारतीयों को मुक्त करने वाले देश के पहले मुक्तिदाता हैं। उन्होने मारीच,तड़का, शुपर्णरेखा और रावण जैसे आतंकियों के बर्बरता और अत्याचार से संत्रस्त भारतीय समाज एवं जनमानस को भयमुक्त किया था। रामराज्य सुशासन का द्योतक है। सर्वाधिक है सर्व विदित है कि भगवान राम अपहरणकर्ता एवं राक्षस राज रावण को मारकर 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे।b उन्होंने कहा कि भगवान राम विष्णु के 7वें अवतार हैं। राम 16 गुण और 12 कलाओं से युक्त हैं। संसार में दो ही सुंदर नाम हैं- कृष्ण व राम। राम का अर्थ ही है रमा हुआ तत्व। राम नाम लिखना और उनका ध्यान करना महायज्ञ से कम नहीं है। राम नाम रटने से मन को स्थिरता व शांति मिलती है। राम नाम जपने से ब्रह्म ज्ञान की प्राप्ति होती है आनंद की अनुभूति होती है। सकल पाप, ताप एवं द्वंद नष्ट हो जाते हैं। जैसा की रत्नाकर ने राम का उल्टा नाम जप कर भी ब्रह्म समान हो गया और उसने भगवान राम के जीवन पर रामायण लिखकर आदिकवि वाल्मीकि कहलाया। अतः प्रभु श्रीराम का महत्व कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा।
राजनीतिक विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ देवेंद्र कुमार गोयल ने कहा कि राम हिंदू धर्म के आराध्य देव हैं। इस सत्य से इनकार नहीं किया जा सकता है। यदि हिंदुस्तान के सभी अवतार सत्य हैं, तो रमावतार भी सत्य है। भगवान राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। उनका विचार आज भी प्रासंगिक। उनसे सीख मिलती है कि व्यक्ति को अपने से बड़ों का सम्मान करना चाहिए। गुरु के प्रति आदर का भाव रखना चाहिए। हमें तो बहुत खुशी हो रही है की 22 जनवरी को केंद्र सरकार के द्वारा राम के विग्रह की प्राण-प्रतिष्ठा हाेगी। राम हर लोगों के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। उनका अवतार, अत्याचार, अधर्म और आतंक का नाश करने के लिए हुआ था। उन्होने आसुरी आतंकवाद का नाश किया था। भगवान राम का मंदिर निर्माण होना व प्राण प्रतिष्ठा होना हमारे लिए गौरव की बात है।
अर्थशास्त्र के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रोफेसर सरदार राय ने कहा कि राम हमारे इष्ट देव हैं। वे मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। परंतु आज के पुरुष उन्हें काल्पनिक बताते हैं। उनपर छींटाकशी करते हैं। यही तो आश्चर्य है। भगवान राम की महिमा पहले भी थी। आज भी है, और हमेशा रहेगी। उनमें सेवाभाव, त्याग, सत्य, मर्यादा, सदाचार, क्रियाशीलता, सहनशीलता, धैर्य तथा करुणा के देवोपम गुण ही उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम और प्रभु श्री राम के रुप में प्रतिष्ठित करते हैं। राम के हर शब्द, हर वाक्य और विचार मान ग्रहणीय है।
इतिहास के विभागाध्यक्ष डॉ सत्यार्थ प्रकाश ने कहा कि श्री राम हिंदू धर्म के सर्वश्रेष्ठ देव हैं। उनका विचार और उपदेश हमेशा प्रासंगिक व उपादेयरहा है। सबसे ज्यादा इनकी पूजन होती है। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और उनके विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की तारीख नजदीक आते ही हिंदू धर्मावलंबी व राम भक्त खुशी से उछल रहे हैं। 22 जनवरी 2024 को हम भी अपने घरों में दीप जलाएंगे और खुशी मनाएंगे। उन्होंने कहा कि बाबर शासन काल में उसका सेनापति मीर बाकी ताशकंदी ने 1528 में राम मंदिर को नष्ट कर दिया था। मंदिर की रक्षा में लाखों लोग मारे गए थे। हमें बहुत सुकून मिल रहा है कि 500 वर्षों के बाद आज राम मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा का पुनीत कार्य चल रहा है।

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