लौह-अयस्क की जमीन के अधिग्रहण के लिए जल्द होगा सर्वे, सिकंदरा प्रखंड के पांच गांव में भंडार

लौह-अयस्क की जमीन के अधिग्रहण के लिए जल्द होगा सर्वे, सिकंदरा प्रखंड के पांच गांव में भंडार


🔸अंचलाधिकारी ने कहा नए सिरे से बसाए जाएंगे गांव।

सिकन्दरा/जमुई : जमुई के सिकंदरा प्रखंड क्षेत्र के मंजोष, घोष, जलय, बक्सनपुर और गोरडीह यह पांच गांव ऐसे हैं, जहां की जमीन में मैग्नेटाइट का भंडार दबा हुआ है। जहां इस गांव की जमीन में करीब चार करोड़ 84 लाख टन मैग्नेटाइट का भंडार है। इन सभी गांव में भूमि अधिग्रहण के लिए बजट तैयार किए जा रहे हैं। अनुमान है कि जल्द ही यहां पर लोहे के खदान की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इस गांव के करीब दो हजार एकड़ के क्षेत्रफल में लोह अयस्क का भंडार दबा है। इसके लिए कागजी कार्रवाई शुरू हो गई है।

सर्वे के शुरुआती दो चरणों में ही मंजोष गांव और आसपास के तीन वर्ग किलोमीटर के दायरे में धरती के नीचे 4.84 करोड़ टन मैग्नेटाइट का भंडार दबे होने की जानकारी सामने आ चुकी है। इसका अनुमानित मूल्य करीब 6 हजार करोड़ आंका गया है। 

   जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से अब तक दो चरणों में किए जा चुके सर्वे के दौरान मंजोष के पत्थरों में 50 फीसदी से ज्यादा लौह अयस्क मिलने की पुष्टि हो चुकी है। 2016-18 के दौरान जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की टीम ने लगातार दो सालों तक मंजोष गांव में सर्वे किया था। इस दौरान जीएसआई की टीम ने मंजोष गांव में 11 स्थानों पर भूच्छेदन कर लौह अयस्क का जायजा लिया। सर्वे के दौरान भूछेदन से प्राप्त हुए सैंपल को लैब में जांच के लिए भेजा गया। लैब टेस्टिंग के बाद सैंपल में 50-60 फीसदी तक लौह अयस्क पाए जाने की पुष्टि हुई है। इस दौरान आयरन के अलावा सफेद संगमरमर भी निकलते देखा गया था।

दरअसल, 20 साल पहले मंजोष गांव के पहाड़ी इलाके में बच्चों को खेलने के दौरान एक चुम्बक से एक काला रंग का पत्थर चिपक गया था। इसके बाद मिट्टी के कुछ अंश भी चुंबक में चिपकने लगे थे। तब लोगों को लगा कि यहां की मिट्टी में लोहा मिला हुआ है। बाद में इस गांव की एक पहाड़ी पर काले रंग के ऐसे कई अवशेष मिले।

रिटायर अमीन तपेश्वर पंडित ने बताया कि कि 60 से 70% लोह अयस्क यहां के जमीन के अंदर है। 10 वर्षों से इसका छानबीन चल रहा है। हम लोग चाहते हैं कि सरकार के खनन विभाग द्वारा खनन का काम कराया जाए। यहां कम्पनी लगे। जिससे बेरोजगारी भी खत्म होगी।

उन्होंने बताया कि कृषि के खेत लायक जो जमीन जा रही है, उसके बदले ग्रामीण जनता को रोजगार और मुआवजा मिले। उन्होंने बताया लगभग पांच गांव खनन होने से प्रभावित होंगे। 15 सौ एकड़ जमीन जाएगा, दो हजार घर प्रभावित होंगे। उन्होंने यह भी बताया कि घर टूटने से किसी को कोई आपत्ति नहीं होगी। उन्होंने बताया कि सरकार की तरफ से 2017-22 तक सर्वे होता रहा है। 

वहीं सिकंदरा अंचलाधिकारी कृष्ण कुमार सौरव ने बताया कि अभी प्राथमिक चरण में सभी जमीनों का नक्शा तैयार किया जा रहा है। इसके बाद जमीन अधिग्रहण के लिए राशि स्वीकृति के लिए सरकार के पास भेजी जाएगी। फिर वहां से राशि प्राप्त होने के उपरांत इन जमीनों का अधिग्रहण शुरू कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि जमीन पर जितने भी मकान बने हैं। उन सब को हटाया जाएगा, अभी उन सभी मकानों का आकलन किया जा रहा है कि उनको नए सिरे से बसाने में कुल कितना खर्च आएगा।

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