के.के. पाठक ने शिक्षक संघ की मान्यता को नकारा, नेता और सदस्यता लेने पर कार्रवाई होगी

के.के. पाठक ने शिक्षक संघ की मान्यता को नकारा, नेता और सदस्यता लेने पर कार्रवाई होगी


                  केके पाठक, अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग

🔹छात्रों की अनुपस्थिति पर स्कूल प्रिंसिपल से शो काउज।

सिटी डेस्क, बिहार 

पटना : शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक का एक नया आदेश सामने आया है। आईएएस के के पाठक ने शिक्षक संघ की मान्यता नहीं दी है। बिहार के तमाम शिक्षक संघ को अमान्य करार दिया है।

आईएएस केके पाठक ने अपने निर्देश में कहा है कि शिक्षा विभाग ऐसे किसी संघ की मान्यता नहीं दी है। इसलिए, बिहार के शिक्षक शिक्षा व्यवस्था पर बोले जाने पर शिक्षकों पर कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग में सभी जिला अधिकारियों को पत्र लिखते हुए कहा है कि शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक या शिक्षकेत्तर कर्मियों के किसी भी संघ को मान्यता नहीं दी गई है।

के. के. पाठक ने सदस्य बनने से किया मना :

किसी भी शिक्षक या शिक्षकेत्तर कर्मियों को किसी भी संघ का सदस्य बनने की मनाही है। यदि किसी भी शिक्षक या शिक्षकेत्तर कर्मियों द्वारा किसी भी संघ की स्थापना की जाती है या उसकी सदस्यता ली जाती है तो इसे गंभीर कदाचार माना जाएगा। उक्त शिक्षक और कर्मी के विरूद्ध कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जायेगी।

आदेश में आगे कहा है कि किसी भी शिक्षक या शिक्षकेत्तर कर्मियों द्वारा सोशल मीडिया साइट या समाचार-पत्र या टीवी के माध्यम से अनर्गल प्रचार-प्रसार नहीं किया जाएगा। यदि ऐसा किया जाता है तो इसे गंभीर कदाचार माना जाएगा एवं शिक्षक और कर्मी के विरूद्ध कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जायेगी।

शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने किया डीएम से अनुरोध :

सभी जिलों के जिलाधिकारी से अनुरोध करते हुए के.के. पाठक ने कहा है कि सभी शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मियों से उक्त निर्देश का सख्ती से पालन कराना सुनिश्चित किया जाय। किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता, हड़ताल, प्रदर्शन इत्यादि करने पर संबंधित के विरूद्ध कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की जाय।

छात्रों की अनुपस्थिति कम होने पर होगी कार्रवाई :

शिक्षा विभाग ने जिलाधिकारी को दूसरे आदेश में कहा है कि जिन स्कूल में स्टूडेंट्स की उपस्थिति पच्चास फीसदी से कम होती है। स्कूल के प्रिंसिपल से शो काउज करें। डीएम को कहा है कि राज्य के विद्यालयों में अधिक से अधिक छात्रों की उपस्थिति निश्चित कराने के हर संभव प्रयास किये जा रहे हैं। इसके बावजूद कुछ जिलों में ऐसा पाया जा रहा है कि अभी भी 50 प्रतिशत से कम उपस्थिति वाले विद्यालयों की संख्या काफी अधिक हैं। यह स्थिति स्वीकार योग्य नहीं है।

जिन विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति 50 प्रतिशत से कम पायी जाती है। उन विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को अगले दिन संध्याकाल में अपने कार्यालय में बुलाकर उनसे स्पष्टीकरण प्राप्त करें। साथ ही विद्यालयों में उपस्थिति में अपेक्षित सुधार न होने पर उनके विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई करें।

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