बेटा बना एसडीएम, रिजल्ट जानने से पहले ही पिता की थमी सांसें

बेटा बना एसडीएम, रिजल्ट जानने से पहले ही पिता की थमी सांसें

🔹बेटे को अफसर बनाने की चाहत थी पिता को।

सिटी संवाददाता : राकेश कुमार

       पटना के अस्पताल में पिता वेंटिलेटर पर अपनी आखिरी सांसें गिन रहे थे कि बेटा एसडीएम बन गया। वहीं बेटे की सफलता की खबर सुनने से पहले ही पिता की मौत हो गई। बताते चलें कि वे अपने बेटे को अफसर बनाना चाहते थे। बल्कि सपना भी पूरा हो गया लेकिन बेटे को अफसर के रूप में देखने के लिए वे नहीं रहे। बरहट प्रखंड क्षेत्र तपोवन निवासी ललन कुमार भारती ने 67वीं बीपीएसएसी परीक्षा में सफलता पाई पर उन्हें इस बात का मलाल रह गया कि वे अपने पिता के साथ खुशियां बांट नहीं पाए। वहीं पिता जगदीश दास की प्रेरणा से ही वे सिविल सर्विसेज की तैयारी में जुटे थे। ललन के पिता को पेनक्रिएटिक कैंसर था। जो फोर्थ स्टेज में था। ललन ने कहा कि जब रिजल्ट आया था तो उस वक्त पिता जी पटना के अस्पताल में भर्ती थे और वेंटिलेटर पर थे। मैं रिजल्ट के बारे में उन्हें बताना चाहता था पर वे उस हालत में नहीं थे कि उन्हें कुछ बताता। थोड़ी देर बाद उनकी मौत हो गई। मुझे इस बात का जीवन भर मलाल रहेगा।

वहीं यह बता दें कि ललन कुमार भारती घर के सबसे छोटे बेटे है। उनके पिता जगदीश दास कोलकाता में फुटवियर का कारोबार करते थे। शुरुआत में कोलकाता में जूते-चप्पल की दुकान चलाते थे। हालांकि बाद में वे अपने घर वापस लौट आए थे। जिसके बाद पंचायत चुनाव में वार्ड सदस्य का चुनाव लड़ा और वार्ड मेंबर के पद पर चुनाव जीते। इसी दौरान उन्हें बीमारी का पता चला। 

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