शरद पूर्णिमा और महर्षि बाल्मीकी जयंती मनायी गयी
शरद पूर्णिमा और महर्षि बाल्मीकी जयंती मनायी गयी
सिटी संवाददाता जमुई : प्रो० रामजीवन साहु
आज रविवार दिनांक २९ अक्टूबर २०२३ को जमुई नगर परिषद् अंतर्गत नगर के हृदयस्थली स्थित जिला केन्द्रीय पुस्तकालय, जमुई (अध्ययन केन्द्र मंडल) में शरद पूर्णिमा और महर्षि बाल्मीकी जयंती श्रद्धापूर्ण मनायी गई। इस शुभ अवसर पर जमुई व्यवहार न्यायालय के बरिष्ठ अधिवक्ता प्रभात कुमार भगत ने कहा कि कुवर्ष आश्विन माह के पूर्णमासी को चन्द्रमा का प्रकाश अमृत युक्त होता है, साथ ही यह अमृत सफेद वस्तुओं की ओर अधिक आकर्षित होता है। अतः सनातन धर्म में दृढ़ विश्वास रखने वाले आज के दिन खीर बनाकर चन्द्रमा के प्रकाश में रखते हैं। ऐसा विश्वास है कि इस खीर में अमृत गिरते हैं। इस खीर के खाने से शरीर स्वस्थ रहता है। इसलिए शरद पूर्णिमा को उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
आज ही के दिन यानि आश्विन माह के पूर्णमासी को महर्षि बाल्मीकीजी की जयंती मनायी जाती है, क्योकि इसी माह के पूर्णिमा को उनका जन्म हुआ था। मान्यता यह है कि उनका जन्म ब्राह्मण परिवार में हुआ था, लेकिन बचपन में ही उनको किसी वनवासी ने उनका अपहरण कर लिया था, इसलिए इनका लालन-पालन जंगल में ही हुआ। जिस परिवार में ये पले उनका काम जंगल में आने - जाने वाले लोगों के साथ लूटपाट किया करते थे और कभी-कभी उनकी हत्या भी कर दिया जाता था। महर्षि बाल्मीकी भी यही करते थे। इनका नाम पूर्व में रत्नाकर डाकू था। महर्षि नारदजी के आशीर्वाद से इनका हृदय परिवर्तन हुआ। उनके प्रेरणा से उन्होने संस्कृत में रामायण की रचना किये। इस रचना के कारण श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम कहलाये और जगत पूजनीय हुए।
रामायण की रचना कर उन्होने वर्तमान समाज को समरस बनाने के लिए श्रेष्ठतम कार्य किये। इसलिए बाल्मीकीजी आज भी पूजनीय हैं।

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