मुझे मेरे परिवार-पार्टी से निकाला, मैं टूटा नहीं : चिराग
मुझे मेरे परिवार-पार्टी से निकाला, मैं टूटा नहीं : चिराग
चिराग ने कहा : शेर का बेटा हूं, बिहार फर्स्ट - बिहारी फर्स्ट की बात करना कसूर हो गया।
सिटी ब्यूरो रिपोर्ट : राजीव रंजन/आनन्द कुमार
दरभंगा : सोमवार को ऑल इंडिया पासवान एकता मंच की ओर से दरभंगा में पासवान स्वाभिमान सम्मेलन का आयोजन हुआ जहाँ एलजेपीआर अध्यक्ष चिराग पासवान मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे।
चिराग पासवान ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि मुझे मेरे ही परिवार से निकालकर बाहर फेंक दिया गया। जबकि पिताजी के जाने के बाद जब अपनों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, उन्हीं लोगों ने मुझे सड़क पर छोड़ दिया। यह सोचकर कि चिराग पासवान को परिवार से निकाल देंगे तो चिराग पासवान टूट जाएगा, लेकिन आप लोगों के आशीर्वाद से मैं नहीं टूटा।
वहीं चिराग ने कहा कि हमारे खिलाफ षड्यंत्र रचा गया। चिराग पासवान को उस पार्टी से बाहर निकाला गया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी को 23 साल तक मेरे पिता ने खून पसीने से सींचा, इसके बाद फिर से षड्यंत्र रचा गया कि इसको घर से निकाल दो, तब भी चिराग पासवान नहीं टूटा। क्योंकि जो लोग यह सोचते हैं कि इन बातों से चिराग पासवान टूट जाएगा। तो वह लोग भूल जाते हैं कि चिराग पासवान शेर का बेटा है, ना कभी टूटेगा, ना ही कभी झुकेगा।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि मैं चाहता हूं कि बिहार में ही युवाओं को बेहतर से बेहतर रोजगार के अवसर मिले। यहां के बच्चों के लिए अच्छे से अच्छे संस्थान खुले। यहां के बुजुर्ग और महिलाओं को इलाज के लिए दूसरे प्रदेश का रुख न करना पड़े। क्या यही सोचना मेरा कसूर था। क्या बिहार के किसानों के बारे में सोचना मेरा कसूर बन गया। मजदूरों के अधिकारों की बात करना मेरा कसूर बन गया। बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट की बात करना मेरा कसूर बन गया। इस कसूर के लिए क्या-क्या नहीं किया गया मेरे साथ।
वहीं दूसरी ओर उन्होंने यह भी कह डाला कि जिन्हें सिग्नेचर नहीं करने आता वे शिक्षक बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि पैरवी और पैसा है तो मिल जाएगी नौकरी। नीतीश के शासनकाल में हो रहे भ्रष्टाचार पर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चिराग पासवान ने सीएम नीतीश कुमार पर जमकर हमला करते हुए उन्होंने शिक्षक नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि आपके पास पैसा और पैरवी है तो नौकरी मिल जाएगी। अगर यह आपके पास नहीं है तो लाख कोशिश करने के बाद नौकरी नहीं मिलेगी। जिन्हें सिग्नेचर नहीं करने है तो लाख कोशिश करने के बाद नौकरी नहीं मिलेगी। जिन्हें सिग्नेचर नहीं करने आता है, वे शिक्षक बन रहे हैं।

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